Sunday, 7 October 2012
Saturday, 6 October 2012
इतनी सज़ा काफ़ी है
शबनमी बूंदों में आंसू मिला कर पी लिए मैंने
आज दिन भर के लिए इतना नशा काफ़ी है
तेरी यादों में इतने सख्त लमहे जी लिए मैंने
बकाया उम्र के लिए बस इतनी सज़ा काफ़ी है
सुलग रहा है तो वो कल ख़ाक भी हो जाएगा
दिल से जितना भी निकलता है धुआं काफी है
दहशत का दौर है , रात है दरवाज़े बंद रहने दे
इन दरीचों से जितनी आती है हवा काफी है
Thursday, 4 October 2012
मुझे पता है
मुझे पता है बेवफा है तू
फिर भी मैं तुझसे प्यार करता हूँ
ये मोहब्बत ग़रीब की दौलत
सिर्फ तुझ पे निसार करता हूँ
बड़ी सजा है इस गुनाह की लेकिन
फिर भी मैं बार बार करता हूँ
बिछड़ा था तुझसे जिस दोराहे पर
फिर भी मैं तुझसे प्यार करता हूँ
ये मोहब्बत ग़रीब की दौलत
सिर्फ तुझ पे निसार करता हूँ
बड़ी सजा है इस गुनाह की लेकिन
फिर भी मैं बार बार करता हूँ
बिछड़ा था तुझसे जिस दोराहे पर
वहीं खड़ा हूँ तेरा इंतज़ार करता हूँ
प्यार मजबूरी है कोई हक़ तो नहीं
टूटा दिल तार तार करता हूँ
प्यार मजबूरी है कोई हक़ तो नहीं
टूटा दिल तार तार करता हूँ
Wednesday, 3 October 2012
ज़िंदगी क्या है
नहीं मिला है कभी दर्दो ग़म
कैसे समझोगे ज़िंदगी क्या है
उम्र गुज़री है गर अंधेरों में
कैसे जानोगे रोशनी क्या है
तलाशते हैं जो रूप की दौलत
वो क्या जानें कि सादगी क्या है
कहाँ से आके कहाँ जाता है
किसने जाना है आदमी क्या है
मेरे मैय्यत में भी वो चुप ही रहा
उसने दिखलाया बेरुखी क्या है
Saturday, 29 September 2012
क़र्ज़ा न दे सका
पैदा करती है इन्सान को हाँ वही लड़की
ये आदमी जिसे इंसान का दर्ज़ा न दे सका
कितने प्यासों ने देहलीज़ पे दम तोड़ दिया
वो समंदर था एक बूँद भी क़र्ज़ा न दे सका
पढी है ग़ौर से मैंने भी मरासिम की क़िताब
गवाही तेरी वफ़ा की एक भी सफ़हा न दे सका
मसीहा रोशनी का समझा जिसको मैंने उम्र भर
रातों को मेरी उजली सी सुबहा न दे सका
Friday, 28 September 2012
इलज़ाम मेरे सर आये
उसने देखा है मुझे प्यार की निगाहों से
खुदा करे ये वक़्त बस यहीं ठहर जाए
इस मुलाक़ात का कोई भी निशाँ न बचे
इससे पहले कि ये इलज़ाम मेरे सर आये
तेरी दीवारों से टकराया हूँ जाने कितनी बार
क्या ये मुमकिन है कभी तू भी मेरे घर आये
ये हौसला ये तसल्ली ये दुआओं का असर
खुदा करे ये वक़्त बस यहीं ठहर जाए
इस मुलाक़ात का कोई भी निशाँ न बचे
इससे पहले कि ये इलज़ाम मेरे सर आये
तेरी दीवारों से टकराया हूँ जाने कितनी बार
क्या ये मुमकिन है कभी तू भी मेरे घर आये
ये हौसला ये तसल्ली ये दुआओं का असर
क्या करेगा जो सरे शाम कोई मर जाए
नशा यादों का बना रहने दे रात बाक़ी है
मुझे डर है नीम शब ये भी न उतर जाए
नशा यादों का बना रहने दे रात बाक़ी है
मुझे डर है नीम शब ये भी न उतर जाए
Thursday, 27 September 2012
प्यार का बस यही अंदाज़
तेरी हंसी तेरी खुशियों से प्यार करता हूँ
प्यार का बस यही अंदाज़ तो आता है मुझे
अपने ग़म से मेरे चेहरे के रंग बदलते नहीं
एक तेरा दर्द ही आकर के रुलाता है मुझे
प्यार का बस यही अंदाज़ तो आता है मुझे
अपने ग़म से मेरे चेहरे के रंग बदलते नहीं
एक तेरा दर्द ही आकर के रुलाता है मुझे
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