Sunday, 11 November 2012

यूँ ही होता जाता है

दीवान लिखा होगा तूने , कोई पढ़कर हमें सुनाता है
जिसके हिस्से में जो भी है , अपना क़िरदार निभाता है

लगता है ऐसा होता है , क्या सच में ऐसा होता है
या हम सब सोती रूहें है , कोई सपना हमें दिखाता है

तक़दीर का रोना रोते हैं जाने कब से ये अहले जहाँ
क्या सब कुछ पहले से तय है , या यूँ ही होता जाता है

हर पल इस फ़ानी दुनिया के हालात बदलते रहते हैं
बस एक दस्तूर नहीं बदला जो आता है वो जाता है

मेहेरबां बन कर

जो हो सके तो बस आओ दिलो जाँ बनकर
न करो कुछ भी मेहेरबां बन कर

बिना लिबास हूँ दाग़ों को देखती है ज़मीन
ढक दो ज़ख्मों को आसमाँ बन कर

कुछ कहेंगे तो फिर कहेंगे लोग बढ़ बढ़ कर
तमाम उम्र जिए है बेजुबाँ बन कर

मैं थक चुका ज़माने में फ़रिश्तों से मिल कर
मेरे घर आओ कभी इन्सां बनकर

Saturday, 10 November 2012

यहाँ हर आदमी सुलगता है

दोनों हमजात हैं इंसान हैं हम
तू मेरा कुछ न कुछ तो लगता है

ये बात और है धुंआ न उठे
यहाँ हर आदमी सुलगता है

है कई लोग जो चैन से सो लेते हैं
और कोई सारी उम्र जगता है

जिसमें ताकत है साफ़ दामन है
जो है कमज़ोर दागदार लगता है

Friday, 9 November 2012

अब जा चुकी बरसात

वो आते हैं मिलते हैं मगर बेरुखी के साथ
करते हैं इंतज़ार जिनका सारी सारी रात

हमको तो राहे इश्क़ में बस सिसकियाँ मिलीं
होता है इस तरह क्या हर एक आदमी के साथ

एक अश्कों का दरिया है ये मेरी ज़िंदगी
मुझसे न सही आँख से करते तो मुलाक़ात

कह दो ये गुंचों से न निकलें ज़मीन से
ये काँटों का मौसम है अब जा चुकी बरसात

Thursday, 8 November 2012

निगाह बार बार मिलती है

नहीं मिलती है  किसी से राहत     
निगाह बार बार मिलती है

नहीं हासिल है ज़ख्म को मरहम 
तसल्ली बेशुमार मिलती है

धूप निकली है ज़माने में हमें
रोशनी भी उधार मिलती है

उठती मौजों में क्या करें हम भी
ज़िंदगी दरिया पार मिलती है

Wednesday, 7 November 2012

वारदात बाक़ी है

कहो सहर से कि रात बाकी है
तुझसे कहनी थी बात बाकी है

चंद लोगों से ही मिला हूँ मैं
अभी तो क़ायनात  बाकी है

तू रूबरू है तब क्यूँ लगता है
कि तुझसे मुलाक़ात बाकी है
  
लुटे हैं फिर भी सोचते हैं लोग
कोई नयी वारदात बाक़ी है 

Monday, 5 November 2012

विस्मित हो ,मत रो मन

जीवन से जीवन जन्मा है
इसी तरह बच पाया जीवन
मैं भीगा हूँ तुम भीगोगे
जब जब भी बरसेगा सावन

मेरा मेरा क्यूँ करता है
करना है तो राम राम कर
विष पी कर हंस शिव बन
अपना ले सबसे अपनापन

मैं जाऊँगा तुम आओगे
तुम जाओगे वो आएगा
काल चक्र की सुन  धुन 
विस्मित हो ,मत रो मन