Thursday, 20 June 2013

हर एक खुशी से पहले

ग़म देर तक रुका है हर एक खुशी से पहले
हाँ   कुछ तो होश था हमें इस बेखुदी से पहले

ये  वक़्त का जादू है  किस को न बदल डाले
इंसान  एक बना  था इस आदमी से पहले

इस खेल में  किसी का मुक़द्दर न  डूब जाए
थोडा था सोचा करिए एक दिल्लगी  से पहले

ख्वाबों का आशियाँ क्यूँ कर सजाये कोई
सामान ए मौत हाज़िर है ज़िंदगी से पहले

Sunday, 16 June 2013

कुछ इस तरह गए तुम

कुछ इस तरह गए तुम मेरी ज़िंदगी में आके
ठहरे हुए पानी को हिला दे कोई पत्थर

जितनी भी कोशिशें कीं लहरों ने बिछड़ने की
हर बार उतना ही बड़ा होता गया सागर

औरों से पूछते हो क्या मैं अभी ज़िंदा हूँ
बेहतर है मेरे घर में खुद देख लो आकर

Wednesday, 20 March 2013

पत्ते सूखे ही सही

पत्ते सूखे ही सही फिर भी एक गवाह तो हैं 
इस  बयाबां में भी  एक दिन बहार आयी थी

भले ही  लाख  कहो प्यार नहीं था   मुझसे
मिली जो नज़रें तेरी आँख क्यूँ शरमाई थी

अलग मिला था सिला प्यार का हम दोनों को
वो  दास्ताँ तेरी शोहरत मेरी रुसवाई थी

गुलों की शोखियों ने तुझको भुलाने न दिया
झूमती शाख को देखा तू याद आयी थी  

Friday, 8 February 2013

ग़र न हो

ग़र न हो आब तो आंसू मिलाइये
बड़ी है तल्ख़ ये ग़मों की शराब

या ख़ुदा काश ये भी हो सकता
तेरे चेहरे पे जो रुक जाता शबाब

ज़िंदगी हुस्न की तिजारत है
यहाँ हर उम्र को देना है हिसाब

बहस तो हर रोज़ हुआ करती है
उनमें होते नहीं सवालों के जवाब

Saturday, 2 February 2013

एक आशियाँ था यहाँ

एक आशियाँ था यहाँ
कहाँ गया चलो आँधियों से पूछते हैं

एक घोंसला था चिड़िया का
किसने तोडा चलो पंछियों से पूछते हैं

बिना बताये उनका चुप रहना
कोई इतना तो बताये वो क्यूँ रूठते हैं

हवा चले या कि खामोश रहे
पत्तों को टूटना होता है सो रोज़ टूटते हैं

Sunday, 27 January 2013

AJ qawali



ये कौन ले रहा है अंगडाई , आसमानों को नींद आती है

साकिया टाल न प्यासा मुझे मयखाने से
मेरे हिस्से की  छलक जायेगी पैमाने से


न तुम आये न शबे इन्तिज़ार गुज़री है
तलाश में है सहर बार बार गुज़री है

वो बात जिसका फ़साने में कोई ज़िक्र न था
वो बात उनको बहुत नागवार गुज़री है

न गुल खिले न उनसे मिले न मय  पी है
अजीब रंग में अबके बहार गुज़री है


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साग़र से सुराही टकराती , बादल को पसीना आ जाता
थोड़ी सी अगर छलका देते , सावन का महीना आ जाता
मंदिर मस्जिद में जाता है  तू ढूँढने जिसको दीवाने
दिल में ही रब मिल जाता तुझे
  , गर प्यार से जीना आ जाता
टूटा है अगर  तेरा दिल तो   ,इतना भी न रो और आह न भर
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आह को चाहिए एक उम्र असर होने तक
कौन जीता है तेरी ज़ुल्फ के सर होने तक
हमने माना की तगाफुल न करोगे लेकिन
ख़ाक हो जायेंगे हम उनको खबर होने तक 
आशिक़ी सब्र-तलब और तमन्ना बेताब
दिल का क्या रंग करूँ ख़ून-ए-जिगर होने तक।

ग़म-ए-हस्ती का असदकिस से हो जुज़ मर्ग इलाज
शमा हर रंग में जलती है सहर होने तक।

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जो मैं इतना जानती की प्रीत किये दुःख होय
तो नगर ढिंढोरा पीटती कि प्रीत न करियो कोय

नदी पार धुआं उठे मेरे दिल में खलबल होय
जा के काजे जोगन बनी कहीं वही न जलता होय
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रांझे मैं तुझपे वारी
रान्झेया आजा एक वारी

रांझे मैं तुझपे वारी
रान्झेया आजा एक वारी

रित फूलों वाली तेरे बिन बीत जांदी ऐ
रांझे मैं तुझपे वारी
रान्झेया आजा एक वारी

रांझे मैं तुझपे वारी
रान्झेया आजा एक वारी

तेरे बिन सूना लागे सारा ये जहान वे
तेरे बिन सूना लागे सारा ये जहान वे


याद तेरी आंदी मेरी निकले है जान वे
कल्ली मैं तो हारी ये दुनियाँ  जित जांदी ऐ

रांझे मैं तुझपे वारी
रान्झेया आजा एक वारी

रांझे मैं तुझपे वारी
रान्झेया आजा एक वारी


रित फूलों वाली तेरे बिन बीत जांदी ऐ

टूटा है अगर  तेरा दिल तो  ,इतना भी न रो और आह न भर
औरों के आंसू पीता चल
, तुझे कुछ तो पीना आ जाता

पीने वाले क्यूँ गली गली ढूँढा करते फिर मयखाने
गर उनको तुम्हारी आँखों से पीने का करीना आ जाता


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प्यार सिमटे तो तेरे होठों तक
गर जो फैले तो ये जहां कम है

क़त्ल कर के मेरा वो कहते हैं
हुआ है जो भी वो हुआ कम

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बाज़ीचा ऐ अफ्ताल है दुनिया मेरे आगे
होता है शबो रोज़ तमाशा मेरे आगे

ईमां  मुझे रोके है तो खींचे है मुझे कुफ्र
क़ाबा मेरे पीछे है कलीसा मेरे आगे

मत पूछ कि क्या रंग है मेरा तेरा पीछे
ये देख कि क्या रंग है तेरा मेरे आगे

गो हाथ में जुम्बिश नहीं आँखों में तो दम है
रहने दो अभी
  साग़रो मीना मेरे आगे

साग़र से सुराही टकराती , बादल को पसीना आ जाता
थोड़ी सी अगर छलका देते , सावन का महीना आ जाता






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Friday, 11 January 2013

दिल की सज़ा होता है

जब हिलाती है हवा कोई चमन की डाली
तेरे आने का गुमाँ होता है

अब यहाँ लोग जुबां से तो  कुछ नहीं कहते 
दर्द आँखों से बयाँ  होता है

इश्क़ की आग से पड़ते नहीं चेहरों पे दाग़ 
बस जिगर जल के धुंआ होता है

जो जा रहे हैं इन्ही राहों पे समझा दो उन्हें
प्यार  एक दिल की सज़ा होता है