ग़म देर तक रुका है हर एक खुशी से पहले
हाँ कुछ तो होश था हमें इस बेखुदी से पहले
ये वक़्त का जादू है किस को न बदल डाले
इंसान एक बना था इस आदमी से पहले
इस खेल में किसी का मुक़द्दर न डूब जाए
थोडा था सोचा करिए एक दिल्लगी से पहले
ख्वाबों का आशियाँ क्यूँ कर सजाये कोई
सामान ए मौत हाज़िर है ज़िंदगी से पहले
Thursday, 20 June 2013
Sunday, 16 June 2013
कुछ इस तरह गए तुम
कुछ इस तरह गए तुम मेरी ज़िंदगी में आके
ठहरे हुए पानी को हिला दे कोई पत्थर
जितनी भी कोशिशें कीं लहरों ने बिछड़ने की
हर बार उतना ही बड़ा होता गया सागर
औरों से पूछते हो क्या मैं अभी ज़िंदा हूँ
बेहतर है मेरे घर में खुद देख लो आकर
ठहरे हुए पानी को हिला दे कोई पत्थर
जितनी भी कोशिशें कीं लहरों ने बिछड़ने की
हर बार उतना ही बड़ा होता गया सागर
औरों से पूछते हो क्या मैं अभी ज़िंदा हूँ
बेहतर है मेरे घर में खुद देख लो आकर
Wednesday, 20 March 2013
पत्ते सूखे ही सही
पत्ते सूखे ही सही फिर भी एक गवाह तो हैं
इस बयाबां में भी एक दिन बहार आयी थी
भले ही लाख कहो प्यार नहीं था मुझसे
मिली जो नज़रें तेरी आँख क्यूँ शरमाई थी
अलग मिला था सिला प्यार का हम दोनों को
वो दास्ताँ तेरी शोहरत मेरी रुसवाई थी
गुलों की शोखियों ने तुझको भुलाने न दिया
झूमती शाख को देखा तू याद आयी थी
इस बयाबां में भी एक दिन बहार आयी थी
भले ही लाख कहो प्यार नहीं था मुझसे
मिली जो नज़रें तेरी आँख क्यूँ शरमाई थी
अलग मिला था सिला प्यार का हम दोनों को
वो दास्ताँ तेरी शोहरत मेरी रुसवाई थी
गुलों की शोखियों ने तुझको भुलाने न दिया
झूमती शाख को देखा तू याद आयी थी
Friday, 8 February 2013
ग़र न हो
ग़र न हो आब तो आंसू मिलाइये
बड़ी है तल्ख़ ये ग़मों की शराब
या ख़ुदा काश ये भी हो सकता
तेरे चेहरे पे जो रुक जाता शबाब
ज़िंदगी हुस्न की तिजारत है
यहाँ हर उम्र को देना है हिसाब
बहस तो हर रोज़ हुआ करती है
उनमें होते नहीं सवालों के जवाब
बड़ी है तल्ख़ ये ग़मों की शराब
या ख़ुदा काश ये भी हो सकता
तेरे चेहरे पे जो रुक जाता शबाब
ज़िंदगी हुस्न की तिजारत है
यहाँ हर उम्र को देना है हिसाब
बहस तो हर रोज़ हुआ करती है
उनमें होते नहीं सवालों के जवाब
Saturday, 2 February 2013
एक आशियाँ था यहाँ
एक आशियाँ था यहाँ
कहाँ गया चलो आँधियों से पूछते हैं
एक घोंसला था चिड़िया का
किसने तोडा चलो पंछियों से पूछते हैं
बिना बताये उनका चुप रहना
कोई इतना तो बताये वो क्यूँ रूठते हैं
हवा चले या कि खामोश रहे
पत्तों को टूटना होता है सो रोज़ टूटते हैं
कहाँ गया चलो आँधियों से पूछते हैं
एक घोंसला था चिड़िया का
किसने तोडा चलो पंछियों से पूछते हैं
बिना बताये उनका चुप रहना
कोई इतना तो बताये वो क्यूँ रूठते हैं
हवा चले या कि खामोश रहे
पत्तों को टूटना होता है सो रोज़ टूटते हैं
Sunday, 27 January 2013
AJ qawali
ये कौन ले रहा है अंगडाई , आसमानों को नींद आती है
साकिया टाल न प्यासा मुझे मयखाने से
मेरे हिस्से की छलक जायेगी पैमाने से
न तुम आये न शबे इन्तिज़ार गुज़री है
तलाश में है सहर बार बार गुज़री है
वो बात जिसका फ़साने में कोई ज़िक्र न था
वो बात उनको बहुत नागवार गुज़री है
न गुल खिले न उनसे मिले न मय पी है
अजीब रंग में अबके बहार गुज़री है
दिल में ही रब मिल जाता तुझे , गर प्यार से जीना आ जाता
दिल का क्या रंग करूँ ख़ून-ए-जिगर होने तक।
ग़म-ए-हस्ती का ‘असद’ किस से हो जुज़ मर्ग इलाज
शमा हर रंग में जलती है सहर होने तक।
.........................................................
जो मैं इतना जानती की प्रीत किये दुःख होय
तो नगर ढिंढोरा पीटती कि प्रीत न करियो कोय
नदी पार धुआं उठे मेरे दिल में खलबल होय
जा के काजे जोगन बनी कहीं वही न जलता होय
...............................................................
रांझे मैं तुझपे वारी
रान्झेया आजा एक वारी
रांझे मैं तुझपे वारी
रान्झेया आजा एक वारी
रित फूलों वाली तेरे बिन बीत जांदी ऐ
रांझे मैं तुझपे वारी
रान्झेया आजा एक वारी
रांझे मैं तुझपे वारी
रान्झेया आजा एक वारी
तेरे बिन सूना लागे सारा ये जहान वे
तेरे बिन सूना लागे सारा ये जहान वे
याद तेरी आंदी मेरी निकले है जान वे
कल्ली मैं तो हारी ये दुनियाँ जित जांदी ऐ
रांझे मैं तुझपे वारी
रान्झेया आजा एक वारी
रांझे मैं तुझपे वारी
रान्झेया आजा एक वारी
रित फूलों वाली तेरे बिन बीत जांदी ऐ
टूटा है अगर तेरा दिल तो ,इतना भी न रो और आह न भर
औरों के आंसू पीता चल , तुझे कुछ तो पीना आ जाता
पीने वाले क्यूँ गली गली ढूँढा करते फिर मयखाने
गर उनको तुम्हारी आँखों से पीने का करीना आ जाता
प्यार सिमटे तो तेरे होठों तक
गर जो फैले तो ये जहां कम है
क़त्ल कर के मेरा वो कहते हैं
हुआ है जो भी वो हुआ कम
…………………………..
बाज़ीचा ऐ अफ्ताल है दुनिया मेरे आगे
होता है शबो रोज़ तमाशा मेरे आगे
ईमां मुझे रोके है तो खींचे है मुझे कुफ्र
क़ाबा मेरे पीछे है कलीसा मेरे आगे
मत पूछ कि क्या रंग है मेरा तेरा पीछे
ये देख कि क्या रंग है तेरा मेरे आगे
गो हाथ में जुम्बिश नहीं आँखों में तो दम है
रहने दो अभी साग़रो मीना मेरे आगे
साग़र से सुराही टकराती , बादल को पसीना आ जाता
थोड़ी सी अगर छलका देते , सावन का महीना आ जाता
साकिया टाल न प्यासा मुझे मयखाने से
मेरे हिस्से की छलक जायेगी पैमाने से
न तुम आये न शबे इन्तिज़ार गुज़री है
तलाश में है सहर बार बार गुज़री है
वो बात जिसका फ़साने में कोई ज़िक्र न था
वो बात उनको बहुत नागवार गुज़री है
न गुल खिले न उनसे मिले न मय पी है
अजीब रंग में अबके बहार गुज़री है
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साग़र से सुराही टकराती , बादल को पसीना आ जाता
थोड़ी सी अगर छलका देते , सावन का महीना आ जाता
मंदिर मस्जिद में जाता है
तू ढूँढने जिसको दीवानेसाग़र से सुराही टकराती , बादल को पसीना आ जाता
थोड़ी सी अगर छलका देते , सावन का महीना आ जाता
दिल में ही रब मिल जाता तुझे , गर प्यार से जीना आ जाता
टूटा है अगर तेरा दिल तो ,इतना भी न रो और
आह न भर
....
आह को चाहिए एक उम्र असर होने तक
कौन जीता है तेरी ज़ुल्फ के सर होने तक
....
आह को चाहिए एक उम्र असर होने तक
कौन जीता है तेरी ज़ुल्फ के सर होने तक
हमने माना की तगाफुल न करोगे लेकिन
ख़ाक हो जायेंगे हम उनको खबर होने तक
आशिक़ी सब्र-तलब और तमन्ना बेताबख़ाक हो जायेंगे हम उनको खबर होने तक
दिल का क्या रंग करूँ ख़ून-ए-जिगर होने तक।
ग़म-ए-हस्ती का ‘असद’ किस से हो जुज़ मर्ग इलाज
शमा हर रंग में जलती है सहर होने तक।
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जो मैं इतना जानती की प्रीत किये दुःख होय
तो नगर ढिंढोरा पीटती कि प्रीत न करियो कोय
नदी पार धुआं उठे मेरे दिल में खलबल होय
जा के काजे जोगन बनी कहीं वही न जलता होय
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रांझे मैं तुझपे वारी
रान्झेया आजा एक वारी
रांझे मैं तुझपे वारी
रान्झेया आजा एक वारी
रित फूलों वाली तेरे बिन बीत जांदी ऐ
रांझे मैं तुझपे वारी
रान्झेया आजा एक वारी
रांझे मैं तुझपे वारी
रान्झेया आजा एक वारी
तेरे बिन सूना लागे सारा ये जहान वे
तेरे बिन सूना लागे सारा ये जहान वे
याद तेरी आंदी मेरी निकले है जान वे
कल्ली मैं तो हारी ये दुनियाँ जित जांदी ऐ
रांझे मैं तुझपे वारी
रान्झेया आजा एक वारी
रांझे मैं तुझपे वारी
रान्झेया आजा एक वारी
रित फूलों वाली तेरे बिन बीत जांदी ऐ
टूटा है अगर तेरा दिल तो ,इतना भी न रो और आह न भर
औरों के आंसू पीता चल , तुझे कुछ तो पीना आ जाता
पीने वाले क्यूँ गली गली ढूँढा करते फिर मयखाने
गर उनको तुम्हारी आँखों से पीने का करीना आ जाता
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प्यार सिमटे तो तेरे होठों तक
गर जो फैले तो ये जहां कम है
क़त्ल कर के मेरा वो कहते हैं
हुआ है जो भी वो हुआ कम
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बाज़ीचा ऐ अफ्ताल है दुनिया मेरे आगे
होता है शबो रोज़ तमाशा मेरे आगे
ईमां मुझे रोके है तो खींचे है मुझे कुफ्र
क़ाबा मेरे पीछे है कलीसा मेरे आगे
मत पूछ कि क्या रंग है मेरा तेरा पीछे
ये देख कि क्या रंग है तेरा मेरे आगे
गो हाथ में जुम्बिश नहीं आँखों में तो दम है
रहने दो अभी साग़रो मीना मेरे आगे
साग़र से सुराही टकराती , बादल को पसीना आ जाता
थोड़ी सी अगर छलका देते , सावन का महीना आ जाता
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Friday, 11 January 2013
दिल की सज़ा होता है
जब हिलाती है हवा कोई चमन की डाली
तेरे आने का गुमाँ होता है
अब यहाँ लोग जुबां से तो कुछ नहीं कहते
दर्द आँखों से बयाँ होता है
इश्क़ की आग से पड़ते नहीं चेहरों पे दाग़
बस जिगर जल के धुंआ होता है
जो जा रहे हैं इन्ही राहों पे समझा दो उन्हें
प्यार एक दिल की सज़ा होता है
तेरे आने का गुमाँ होता है
अब यहाँ लोग जुबां से तो कुछ नहीं कहते
दर्द आँखों से बयाँ होता है
इश्क़ की आग से पड़ते नहीं चेहरों पे दाग़
बस जिगर जल के धुंआ होता है
जो जा रहे हैं इन्ही राहों पे समझा दो उन्हें
प्यार एक दिल की सज़ा होता है
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