Chithhi
Saturday, 1 September 2012
सरहदें बदलतीं हैं
क्या बताएं कि कहाँ तक है दिल की दुनिया
रोज़ ही सरहदें बदलतीं हैं
आज मेरे हो कल किसी और के हो सकते हो
बारहा चाहतें बदलती हैं
जब भी भर जाता है दिल आँख छलक जाती है
इस तरह हसरतें निकलती हैं
ज़रा जल जाएँ तो फिर कितना तड़पते हैं लोग
शमाएँ सारी रात जलतीं हैं
Friday, 31 August 2012
कुछ दुआ कम है
प्यार सिमटे तो तेरे होठों तक
गर जो फैले तो ये जहां कम है
क़तरा बाकी नहीं जिगर में मेरे
उनको लगता है खूं बहा कम है
लोग बचते हैं मेरा नाम लेने से
आज रुसवाइयों का ये आलम है
तू मिला है न मिलेगा मुझको
मेरे हिस्से में कुछ दुआ कम है
क़त्ल कर के मेरा वो कहते हैं
हुआ है जो भी वो हुआ कम है
Wednesday, 29 August 2012
चाहता हूँ तुझे
तेरी कमियाँ पसंद आने लगीं
ऐसा लगता है चाहता हूँ तुझे
मांग कर रब से थक गया हूँ मैं
आज तुझ ही से मांगता हूँ तुझे
मय से बुझती तो बुझ गयी होती
रूह की प्यास कब पीने से बुझे
मेरी रग रग में रह रहा है तू
दर ब दर मैं तलाशता हूँ तुझे
Tuesday, 28 August 2012
हम सादगी का तेरी
हम सादगी का तेरी करें किस तरह बयाँ
मासूमियत ही जैसे इंसान बन गयी है
कुछ पल के लिए आयी आँखों में तेरी सूरत
अब रातो दिन की जैसे महमान बन गयी है
एक तेरी आरज़ू भी कर ली है जब से दिल ने
मेरी हर ग़ज़ल का जैसे उन्वान बन गयी है
मिलने से पहले तुझसे अपना वजूद भी था
अब तू ही ज़िंदगी की पहचान बन गयी है
तब दिल को धड़कना होता है
जाने कितनी ही रातों में , ये चाँद कहीं खो जाता है
भटकों को राह दिखाने को ,तारों को चमकना होता है
दुनियाँदारों का क्या कहिये ,हर क़दम संभल कर रखते हैं
तब मय का मान बढ़ाने को ,रिंदों को बहकना होता है
दिन से अक्सर लड़ते लड़ते , बेहोश बदन हो जाता है
जीवन की डोर चलाने को
, तब दिल को धड़कना होता है
शाखें पत्ते जब शाम ढले ,सब अपनी थकन मिटाते हैं
आबरू ऐ चमन बचाने को, फूलों को महकना होता है
Wednesday, 15 August 2012
खरीदार ढूँढते हैं
क़त्ल महबूब का हमने अपने हाथों से किया है
आवारा
बन के
गलियों में अब प्यार ढूँढते हैं
सब कुछ तो बिक गया है सियासत के खेल में
अब देश बेचना है खरीदार ढूँढते हैं
जो सदियों से खाती रही मौजों के थपेड़े
उस टूटी हुई क़श्ती में रफ़्तार ढूँढ़ते हैं
अपने ही गुनाहों से मिली है हमें शिक़स्त
क्यूँ जा के बस्तियों में गुनहगार ढूंढते हैं
Friday, 3 August 2012
एक मुश्किल सफ़र है
नहीं ग़म मुझे अपनी रुसवाइयों का
वो बदनाम ना हो मुझे इसका डर है
तुम आओ मगर मेरे पीछे न आओ
मेरा रास्ता एक मुश्किल सफ़र है
किसे दोस्त समझें किसे अपना दुश्मन
जो कल तक इधर था अभी वो उधर है
ना इनके भरोसे घर अपना सजाना
शमाओं का जलवा बस एक रात भर है
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